Thursday, May 22, 2014

गुमनाम.... !!!




दुनिया के तौर-तरीक़े से ... अंजान हम भी थे...
मिलने से उनसे पहले .... गुमनाम हम भी थे ;

सब जान गए शहर में ... उनके इश्क़ से हमको... 
इन गलियों में अब कुछ ... बदनाम हम भी थे ;

गुनाह करने की हमारी ... कैफ़ियत नहीं बदली....
इश्क़ न करने से बहुत ... परेशान हम भी थे ;

बुनियाद हो कमज़ोर तो .. गिरती है इमारत...
गिरती तीमारें देख के ... हैरान हम भी थे ;

गुज़रे न उस गली से ... एहतियात की वाइस...
बादाए-इश्क़ के मगर ... कदरदान हम भी थे ;
(बादाए-इश्क़---प्रेम मदिरा)

मन्सूबे बनाए कितने  ..... मिटाने के हमको.....
सच जीता नहीं जब तक .. परेशान हम भी थे..!!

.............................................................'तरुणा'...!!!


Duniya ke taur-tareeqe se .. anjaan ham bhi the....
Milne se uney pahle ..... gumnaam ham bhi the  ;

Sab jaan gaye shehar me .. unke ishq se hamko...
In galiyon me ab kuchh ... badnaam ham bhi the  ;

Gunaah karne ki hamari ... kafiyat nahi badali .....
Ishq na karne se bahut ... pareshaan ham bhi the ;

Buniyaad ho kamzor to ..... girti hai imaarat ....
Girti teemaare dekh ke ... hairaan ham bhi the  ;

Guzre na us gali se ...... ehtiyaat ki vaais .....
Badaaye-ishq ke magar ... kadardaan ham bhi the ;
(baadaaye-ishq--wine of love)

Mansoobe banaye kitne  ... mitaane ke hamko...
Sach jeeta nahi jab tak .... pareshaan ham bhi the..!!

.................................................................................'Taruna'...!!!



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