Friday, November 9, 2012

पुकार


आज हर तरफ़ इतना सन्नाटा क्यूँ है?
क्या धड़कनों ने मेरी तुमको पुकारा नही है|
ये मत कहना कि व्यस्त हूँ दुनिया के झमेलों में
क्या आज मेरी ओर कोई भी नज़ारा नही है|
क्या मेरी बातों ने तुझको संवारा नही है||

क्यूँ आलम में है आज अजब सी तनहाई
क्या दिल को तेरे,एक याद भी न आई|
दूर हो जाओ जहाँ के हर एक मेले से
मेरी मोहब्बत ने ली है फिर अंगड़ाई|
क्या सांसो ने मेरी तुम्हें आवाज़ न लगाई||

यूँ तो रहते है दिन भर आप चुपचाप
ख़्याल ही बस मेरे,करते है तुमसे बात|
पिसती हूँ हर बार मैं ही तो,इस रेले में
अब न जाने क्यूँ न बरदाश्त है ये रुसवाई|
क्या मेरे दिल को छूना तुझे गवारा नही है|

या मेरी रूह ने अब भी तुझे पुकारा नही है||
.......................................................तरुणा||

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